लोकडाउन और पर्यावरण

by Pankaj Kumar
environment

जैसा कि हम सब जानते है कि पिछले कुछ दिनों मे पुरे भारतवर्ष मे Corona महामारी के चलते लोकडाउन लगा हुआ था। लोकडाउन के चलते पुरा देश मानो थम सा गया था। पुरे देश मे कहीं भी किसी प्रकार कि कोई हलचल नहीं थी। चूँकि लोकडाउन के चलते सरकार ने आवश्यक वस्तुओं को छोड़ कर सारी गतिविधियाँ पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा रखा था, जिस से कि संक्रमण को रोका जा सके ।  सभी गतिविधियाँ पूर्ण रूप से बंद होने के कारण देश के सभी उपक्रम बंद पड़े थे, जिस कारण बहुत लोग बेरोज़गार हो गये थे और बड़े बड़े उधोग धँधे बंद हो चले थे। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं बचा था जो इस महामरी की चपेट मे ना आया हो ।

इसी बीच एक ऐसा क्षेत्र था ’पर्यावरण’ जो बखुबी पनप रहा था, मानो चैन की साँस ले रहा था उसके लिये तो मानो ये लोकडाउन खुशियों की बहार लेकर आया था। जिस पर्यावरण को हमने कभी भी अपना ना समझकर, सदा ही उसे मैला करने की कोशिश की आज वो हमपर मंद मंद मुस्कुरा रहा था।

आज हम उसी पर्यावरण की बात करेंगे जिसे लोकडाउन ने दोबारा जीवित करने का काम किया है।

पीएम स्तर :

यह एक मानक है जिसके द्वारा हम प्रदूषण को मापने का काम करते है। जहाँ एक और पिछले वर्षों में इस पीएम 2.5 का मानक 300 के ऊपर रहा करता था, अब वही मानक लॉकडाउन के दौरान 101 मापा गया था। इसका सबसे ज्यादा असर नयी दिल्ली में देखा जाता रहा है, अब वहीं यह मानक काफी कम रह गया है। इसका सबसे बड़ा कारण है देश के सारे उपक्रमों का बंद होना तथा सभी तरह की सेवाओं का बंद होना।

निर्मल गंगा :

इस दौरान देश कि सभी नदियों में भी इसका असर देखने को मिला है, जहाँ एक ओर भारत सरकार द्वारा चलायेगये सफाई कार्यक्रम दम तोड़ चुके थे, तभी लोकडाउन ने वो सारा काम कुछ ही दिनों मे कर दिया। जहाँ एक ओर सभी नदियां लगभग 50% तक साफ हो चुकी है, नदियों के पानी मे बी ओ डी कि मात्रा मे कमी आयी है तथा ओक्सीज्न की मात्रा मे बढोतरी दर्ज कि गयी है। यमुना नदी भी 33% तक निर्मल हो गयी है इसका सबसे बड़ा कारण है कि बड़ी बड़ी इंडस्ट्रीज का बंद हो जाना जिनके द्वारा सारा वेस्ट मैटीरिअल इन नदियों मे डाला जाता था। जिनके द्वारा इनमें हर दिन प्रदूषण की मात्रा बढ़ती जा रही थी।

ध्वनी प्रदूषण :

ऐसा नहीं है कि सिर्फ वायु प्रदूषण मे ही राहत मिली है ध्वनी प्रदूषण जो कि बड़े शहरों में सारा दिन व्यापक स्तर पर रहता है उसमें भी काफी हद तक कमी आयी है। अगर हम प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड की मानें तो इसमें 5-10 डीबी की कमी आयी है। जिस प्रकार देश के बड़े शहरों मे सारा दिन वाहनों का ताँता लगा रहता था उस से बड़े व्यापक स्तर का धव्नि प्रदूषण हमे देखने को मिलता था । अब चुंकि सब कुछ बंद पडा है तो इसमें काफी सुधार देखने को मिला है।

इसके अलावा अगर हम बात करें तो मौसम का मिजाज जो दिन प्रतिदिन गरम होता जा रहा था उस पर भी कुछ हद तक लगाम लगी है ।

 जिस प्रकार कुछ समय से गर्मियों के मौसम मे कुछ जगह पर लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़़ रहा था उस पर भी कुछ हद तक काबू पाया गया है।

सबसे बड़े आशच्र्य की बात तो यह है कि पंजाब प्रांत के लुधियाना शहर से धोलाधार पर्वतमाला कि चोटीयाँ दिखाई दी है. जो संभव हो पाया है सिर्फ ओर सिर्फ प्रदूषण नियंत्रण के द्वारा।

सबक:

लॉकडाउन से हमें पर्यावरण नियोजन कि यह सीख लेनी पड़ेगी जिसके द्वारा हम अपने आने वाली पीढ़ी के लिये इसे संजो कर रख सकेंगे। हमारे द्वारा जो कुकर्म इस पर्यावरण को खराब करने में किये जा रहे है उसे हमे जल्द ही रोकना होगा। अगर हमारे द्वारा इसे नहीं रोका गया तो, हम इसका अंदाजा भी नहीं लगा सकते कि हम अपने आने वाली पीढ़ी को क्या उपहार स्वरुप दे जायेंगे। ये कहना बेमानी नहीं होगा की हम अपना विनाश खुद ही कर लेंगे, और आने वाली पीढ़ी के लिये ऐसा वातावरण छोड़ जायेंगे जिसमें वो शायद ही  चैन कि साँस ले पायेंगे।

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